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Arya's Family!!

कबीर की उँगलियों में अचानक हल्की हलचल हुई। सोफे पर बैठे विक्रम मल्होत्रा की नज़र जैसे ही उस पर पड़ी, वे पलक झपकते ही उठ खड़े हुए और तेज़ी से कबीर के बेड के पास आ पहुँचे। उन्होंने कबीर का हाथ अपने दोनों हाथों में थाम लिया और बड़ी उम्मीद से उसके चेहरे की तरफ देखने लगे।

वहीं दूसरी तरफ, आर्या के कमरे में सन्नाटा पसरा हुआ था। हर्षवर्धन और ध्रुव काफी देर से उसके होश में आने का इंतज़ार कर रहे थे। दोनों की निगाहें लगातार आर्या के शांत चेहरे पर टिकी हुई थीं।

तभी ध्रुव की जेब में रखे फोन की वाइब्रेशन ने कमरे की खामोशी तोड़ी। स्क्रीन पर अपनी पत्नी का नाम देखते ही ध्रुव के चेहरे पर हल्की खीझ उभर आई। उसने कमरे से बाहर निकलते हुए कॉल रिसीव की और थोड़ी तल्खी से कहा, "कब से कॉल कर रहा हूँ तुम्हें? घर से निकली भी या नहीं? कितनी बार समझाया था कि आर्या को होश आने से पहले हॉस्पिटल पहुँच जाना!"

सामने से ध्रुव की बात को बीच में ही काटते हुए एक बेपरवाह और नखरीली आवाज़ गूँजी, "हाँ तो आ गई हूँ न हॉस्पिटल! अब ये लेक्चर बंद करो और सीधे बताओ कि रूम नंबर कौन सा है?"

"वहीं रुको, मैं खुद लेने आता हूँ तुम्हें," ध्रुव ने झल्लाकर फोन काटा और कमरे के अंदर खड़े हर्षवर्धन की तरफ देखा। पिता ने बिना कुछ कहे बस हल्के से सिर हिलाकर उसे जाने का इशारा किया।

कुछ ही मिनटों में ध्रुव अपनी पत्नी पायल को लेकर कॉरिडोर से गुजर रहा था। पायल की गोद में उनका पाँच-छह साल का बेटा कियान था, जो अपनी मासूम आँखों से अस्पताल के माहौल को देख रहा था। खुद पायल बेहद लाउड मेकअप, डिजाइनर कपड़ों और हील्स में पूरी तरह से सज-धज कर आई थी, जैसे किसी फैमिली गेट-टुगेदर में जा रही हो।

वार्ड के दरवाज़े के बाहर ध्रुव ने पायल का हाथ पकड़कर उसे रोका और संजीदगी से समझाने लगा, "पायल, अंदर जाने से पहले मेरी एक बात ध्यान से सुन लो। डॉक्टर ने साफ कहा है कि आर्या को कोई मेंटल शॉक लगा है। अंदर जाकर ऐसा कुछ भी मत बोलना या करना जिससे उस पर किसी तरह का प्रेशर पड़े। समझी?"

पायल ने अपने बाल पीछे झटकते हुए एक तंजिया मुस्कान के साथ मज़ाक उड़ाया, "अरे छोड़ो भी ध्रुव! तुम्हारी लाडली बहन ने जिंदगी में कभी किसी बात को सीरियसली लिया होता तो आज इस हाल में यहाँ नहीं पड़ी होती। खुद ही हर बात का तमाशा बनाती है।"

"पायल, शट अप!" ध्रुव की आँखों में गुस्सा उतर आया, "अगर ज़रा सी भी तमीज़ बाकी नहीं है तो चुपचाप वापस घर चली जाओ।"

लेकिन पायल ने उसकी डांट को पूरी तरह अनसुना कर दिया और ध्रुव को नज़रअंदाज़ करते हुए सीधे कमरे का दरवाज़ा खोलकर अंदर दाखिल हो गई। ध्रुव भी बेबसी से दांत पीसते हुए उसके पीछे कमरे में आ गया।

कमरे में उस वक्त अजीब सा तनाव था। हर्षवर्धन अपनी कुर्सी से उठकर बेड के करीब आए।तभी, सफेद चादर पर रखी आर्या की उँगलियाँ धीरे-धीरे हरकत करने लगीं। उसकी पलकें फड़फड़ाईं और उसने आहिस्ता-आहिस्ता अपनी आँखें खोल दीं। कमरे में मौजूद चारों लोगों की नज़रें एकटक उस पर टिक गईं—अब यह देखना बाकी था कि 'आर्या' के शरीर में मौजूद अनन्या की रूह इस परिवार को देखकर क्या प्रतिक्रिया देती है।

नन्हा कियान अपनी बुआ को आँखें खोलते देख खुशी से चहक उठा। आर्या इस पूरे घर में उसकी सबसे पसंदीदा जो थी। वह तुरंत ध्रुव की गोद में मचलने लगा और अपने नन्हे हाथ आर्या की तरफ फैलाकर ज़िद करने लगा, "बुआ... बुआ के पास जाना है!"

बेड पर लेटी अनन्या (आर्या) ने बड़ी हैरानी और मासूमियत से उस बच्चे को देखा। अभी कुछ देर पहले ही उसने अपने अजन्मे बच्चे को खोने का असहनीय दर्द झेला था, और अब सामने एक मासूम नन्हीं जान को अपनी तरफ हाथ फैलाते देख उसके सीने में एक अजीब सी टीस उठी। तभी उसके सिर की नसों में एक भयानक टीस उठी। उसने कराहते हुए अपना हाथ माथे पर रखा और सिर को हल्के से दबाया।

यह देखते ही हर्षवर्धन फौरन आगे बढ़े। उन्होंने बेहद नरमी और प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए पूछा, "क्या हुआ प्रिंसेस? सिर में बहुत दर्द हो रहा है?"

आर्या ने धीरे से अपनी पलकें उठाईं और हर्षवर्धन की तरफ देखा। हर्षवर्धन के चेहरे पर एक बेबस, फिक्रमंद पिता की बेइंतहा मोहब्बत साफ झलक रही थी। उन्होंने एक गर्मजोशी भरी मुस्कान के साथ बेहद धीमी और कांपती आवाज में कहा, "क्या हुआ प्रिंसेस... मैं तुम्हें याद तो हूँ ना? तुम्हारा डैड... और ये देखो," उन्होंने पीछे खड़े ध्रुव की तरफ इशारा किया, "ये तुम्हारा बड़ा भाई ध्रुव, और उसकी गोद में तुम्हारा सबसे लाडला भतीजा कियान, जो तुम्हारे बिना एक पल नहीं रहता और जिसे तुम सबसे ज्यादा प्यार करती हो। और ये पायल, तुम्हारी भाभी।"

हर्षवर्धन जिस तरह एक-एक करके सबका नाम ले रहे थे, आर्या की आँखें हर चेहरे पर ठहरती गईं। डॉक्टर के कहे अनुसार पूरा परिवार इस डर में था कि कहीं आर्या अपनी याददाश्त न खो बैठी हो।

ध्रुव से अब और सब्र नहीं हुआ। वह आगे झुका और भरभराई आवाज़ में बोला, "कुछ तो बोलो प्रिंसेस... हम सबकी जान हलक में अटकी है। सच में तुमने हमें पहचाना नहीं क्या?"

कमरे में कुछ पलों के लिए गहरा सन्नाटा छा गया। पायल भी तिरछी नज़र से यह सब देख रही थी।अनन्या ने गहरी सांस ली। उसने समझ लिया कि अगर उसने ज़रा सी भी कमज़ोरी दिखाई, तो सब बिखर जाएगा। आर्या ने उससे अपने परिवार को संभालने का वादा लिया था, और अब यही परिवार उसकी सबसे बड़ी ताकत बनने वाला था।

अनन्या के चेहरे पर एक बेहद सौम्य, सुकून देने वाली मुस्कान खिल उठी। उसने बहुत ही अपनेपन से कहा, "कैसी बातें कर रहे हैं आप भाई? मैं भला आप लोगों को क्यों नहीं पहचानूँगी? फैमिली हैं आप लोग मेरी... मैं अपने परिवार को कभी नहीं भूल सकती।"

आर्या के यह शब्द सुनते ही कमरे का भारी तनाव एक झटके में हवा हो गया।हर्षवर्धन की आँखों से खुशी और राहत का एक आँसू छलक पड़ा, वहीं ध्रुव ने राहत की लंबी सांस ली। सिर्फ पायल के चेहरे पर एक अजीब सी बेरुखी और खीझ तैर गई।

आर्या  ने बिस्तर पर उठकर बैठने की कोशिश करते हुए अपने दोनों हाथ फैला दिए। कियान तुरंत अपने पिता की गोद से निकलकर आर्या के गले से जा लगा। उस बच्चे की धड़कन अपने सीने से लगाते ही आर्या की आँखें चमक उठी!

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