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Accident and Rebirth!

और दूसरी तरफ...

अनन्या तेज़ रफ्तार से अपनी कार चलाते हुए उस रास्ते पर जा रही थी, जहाँ उसे खुद नहीं पता था कि वह कहाँ पहुँचेगी। उसकी आँखों के सामने वो सब पल चल रहे थे जब वो और रोहन साथ थे और निशा के साथ भी उसने अपनी लाइफ का बहोत अच्छा वक़्त बिताया था, अब उनकी सच्चाई सुनने के बाद उसके दिल के टुकड़े हो रहे थे, ऐसा लग रहा था जैसे उसके दिल ने धड़कना बंद कर दिया हो, तभी उसे अपने पिता की डायरी में लिखी हुई बात याद आती है-

"हर मुस्कुराने वाला अपना नहीं होता।"

अपने पिता और माँ का हस्ता हुआ चेहरा देख कर अनन्या को हिम्मत मिलती है और वो अपने आंसू पोंछती है और कहती है- "मां पापा , आप देखना , आपकी बेटी लाइफ में किसी भी सिचुएशन में हार नहीं सकती , आपकी बेटी बहोत स्ट्रांग है और हर सिचुएशन से बहार निकलने का रास्ता निकाल लेती है, अब देखना आप, में अपनी मेहनत से बनाई हुई कंपनी को धोके से किसी को लेने नहीं दूंगी, चाहे वो कोई भी हो!" अनन्या की आँखों में डेटर्मिनेशन साफ़ दिखाई दे रही थी!

अनन्या गाड़ी के कालिंग सिस्टम से मीरा को कॉल लगाती है और कहती है- "मीरा, मुझे सभी बोर्ड मेंबर्स से अभी मिलना है, मीटिंग arrange करो!" तभी उसे realise होता है की गाडी में ब्रेक्स नहीं लग रहे हैं!

मीरा - "ओके मैडम, में अभी arrange करवाती हूँ! वैसे आप ठीक तो हैं न मैडम!? "

अनन्या ने कुछ देर कोशिश की ब्रेक लगाने की, लेकिन अब उसकी आँखों में हैरानी और डर दिखाई देने लगा था , उधर से मीरा की आवाज आ रही थी- "मैडम, ....हेलो, ....क्या आपको मेरी आवाज आ रही है मैडम?"

अनन्या ने घबराते हुए कहा- " मीरा, गाडी के ब्रेक्स फ़ैल हो गए हैं! ब्रेक नहीं लग रहे हैं, गाड़ी भी स्पीड में है, में क्या करु?"

मीरा घबराते हुए बोलती है- "क्या?... मैडम आप गाडी को स्लो डाउन करने की कोशिश कीजिये मैडम, और पैनिक मत कीजिये सब ठीक हो जायेगा बस आप शांत होकर अपने आसपास देखिये कोई मिटटी का ढेर या कोई पेड़ हो जिससे आप सावधानी से उससे क्लैश करवा के बहार निकल सकती हैं, पैनिक मत होइए मैडम"

अनन्या से अब गाडी कण्ट्रोल नहीं हो रही थी फिर भी उसने मीरा की बात को सुनते हुए कहा- " ठीक है मीरा में कोशिश करती हूँ!"

उधर से मीरा और भी इंस्ट्रक्शंस दे रही थी और अनन्या हर पॉसिबल कोशिश कर रही थी गाडी को कण्ट्रोल करने की, तभी अनन्या की नजर सामने पड़ती है क्यूंकि सामने वाली गाडी भी फुल स्पीड में आ रही थी और अब वो गाडी इतनी पास आगयी थी की अनन्या को समझ आगया था की अब कोई चांस नहीं है बचने का!

अनन्या ने अपनी आँखे बंद करदी और भगवन से सच्चे मन से एक ही विश मांगी- "भगवान् में बस एक मौका चाहती हूँ, जो कुछ मेने भरोसे की वजह से गवाया है उसे वापस पाने और अपने गुनहगारों को सजा देने का! बस यही मेरी आखिरी विश है भगवन ....please!"


उधर शहर के दूसरे हिस्से में एक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में अचानक काफी हलचल मच गई थी। डॉक्टर और नर्सें तेजी से एक कमरे से दूसरे कमरे में जा रहे थे। कुछ देर पहले ही एक पेशेंट की हालत अचानक बिगड़ गई थी। कमरे के बाहर लगभग पचास साल का एक आदमी काले सूट में बेचैनी से इधर-उधर घूम रहा था। उसके चेहरे से साफ दिखाई दे रहा था कि वह किसी बड़ी चिंता में था। वह हर गुजरते डॉक्टर और नर्स को रोककर एक ही सवाल पूछ रहा था, "अंदर क्या हो रहा है? मेरा बेटा ठीक है या नहीं?"

लेकिन अस्पताल के स्टाफ के पास उस समय उसे जवाब देने का समय नहीं था। हर कोई मरीज को बचाने में लगा था। वह आदमी कुछ देर तक दरवाज़े के बाहर खड़ा रहा, फिर आखिरकार उसका धैर्य जवाब दे गया। जैसे ही एक डॉक्टर जल्दी-जल्दी कमरे से बाहर आया, उसने आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ लिया।

"तुम लोग मुझे बता क्यों नहीं रहे हो कि हुआ क्या है?" उसकी आवाज़ में गुस्सा और डर दोनों थे। "मेरा बेटा ठीक है या नहीं? और अगर तुमसे उसे संभाला नहीं जा रहा है तो मुझे बता दो। मैं दुनिया के सबसे अच्छे डॉक्टरों को यहाँ बुला दूँगा। लेकिन अगर मेरे बेटे को कुछ हुआ तो..." उसने डॉक्टर की आँखों में देखते हुए कहा, "मैं तुम्हें जिंदा नहीं छोड़ूँगा।"

डॉक्टर ने अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा, "आप शांत हो जाइए। हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं। मरीज की हालत गंभीर है, लेकिन अभी हम कुछ निश्चित नहीं कह सकते।"

उस आदमी ने गुस्से में पूछा, "मुझे अंदर जाने दो।"

"अभी पॉसिबल नहीं है।"

"वह मेरा बेटा है!"

डॉक्टर ने कुछ पल उसे देखा और कहा, "हमें थोड़ी देर दीजिए।"

डॉक्टर वापस अंदर चला गया और वह आदमी वहीं खड़ा रह गया। उसकी मुट्ठियाँ बंधी हुई थीं। पहली बार उसकी आँखों में गुस्से से ज्यादा डर दिखाई दे रहा था। कुछ देर बाद अंदर से अचानक एक नर्स बाहर आई। उसने उस आदमी से कहा की आप रिसेप्शन पर जाकर फॉर्म fill कर दीजिये हमे urgently ऑपरेशन करना पड़ेगा, पेशेंट के ब्रेन में इंटरनल इंजरी है अगर उसको अभी ऑपरेट नहीं किया तो ब्रेन हेमरेज से उनकी जान भी जा सकती है!

ये सुनते हुए उस आदमी के होश उड़ गए, वो आदमी कबीर का पिता ही है{विक्रम मल्होत्रा } , और कोई आम इंसान नहीं इस शहर के सबसे बड़ी लीगल फर्म {मल्होत्रा कंसल्टेंसी} का ओनर भी है, लेकिन आज वो बस एक पिता की तरह अपने बेटे की चिंता में है! उस नर्स के तरफ देखता रहा जबकी नर्स वापस वार्ड में जा चुकी थी , अब उसने अपने पैंट की जेब से एक रुमाल निकाला और अपने माथे पर आये पसीने को पोंछकर वो रिसेप्शन की तरफ बढ़ गया, उसके कदम तेजी से बढ़ रहे थे, जैसे उसके जल्दी करने से उसके बेटे की जान जल्दी से बच जाएगी!

कुछ समय बाद ऑपरेशन रूम के सामने रेड लाइट ऑन थी जिसका मतलब था की अंदर ऑपरेशन चल रहा है!

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उसी समय, सामने वाले मोड़ से आर्या सिंघानिया की तेज़ रफ़्तार लक्ज़री कार आ रही थी।

आर्या, जिसके पास सिंघानिया एम्पायर की बेहिसाब दौलत और परिवार का बेइंतहा लाड़-प्यार तो था, लेकिन उस सोने के पिंजरे ने उसकी अपनी पहचान छीन ली थी। ऊपर से आज सुबह आई रेगुलर मेडिकल रिपोर्ट ने उसकी बची-खुची हिम्मत भी तोड़ दी थी—वह कभी माँ नहीं बन सकती थी। घुटन, लाचारी और अंदरूनी खालीपन से तंग आकर वह आज अपनी साँसों का अंत करने निकली थी। अब उसे लग रहा था की इस दुनिया में उसका जनम सिर्फ दूसरो पर बोझ बनने को ही हुआ है!

जैसे ही दोनों कारों के बंपर टकराने को हुए—वक्त अचानक थम गया।

हवा में उड़ते धूल के कण हवा में ही जम गए। दोनों गाड़ियों की हैडलाइट्स की रोशनी एक अलौकिक, नीली और सुनहरी लौ में तब्दील होकर आसमान तक फैल गई। एक गहरा ब्रह्मांडीय सन्नाटा छा गया।

उस रुकी हुई दुनिया के बीच, अनन्या और आर्या की आत्माएँ अपने-अपने शरीरों से बाहर निकलकर आमने-सामने आ खड़ी हुईं।

शून्य से एक गूंजती हुई रूहानी आवाज़ आई:

> "काल के इस चक्र पर दो रूहें खड़ी हैं। एक जीवन की भीख माँग रही है, तो दूसरी मृत्यु की तलाश में है। बताओ, किसे जीवन चाहिए और किसे मुक्ति?"

अनन्या की आँखों में आँसू और प्रतिशोध की धधकती ज्वाला थी। "मुझे जीना है! मेरे साथ छल हुआ है, मेरे बच्चे और मेरे वजूद को कुचला गया है। मुझे इंसाफ़ चाहिए! और में अपने कातिलों को खुद अपने हाथों से बर्बाद करना और बर्बाद होते देखना चाहती हूँ! "

आर्या ने अनन्या के चेहरे पर तड़प और उसके बच्चे को खोने के दर्द को देखा। आर्या की आँखों से भी एक खामोश आँसू ढुलक गया। उसने आगे बढ़कर अनन्या के काँपते हाथों को थाम लिया।

"मेरे पास सब कुछ था, फिर भी कुछ नहीं... मैं कभी किसी को वह जीवन नहीं दे सकती थी जो तुम अपने भीतर संजोए हो," आर्या की आवाज़ में एक अजीब सा सुकून था। "तुम्हारी आँखों में जीने की जो आग है, वह मुझे मेरी इस बेमानी ज़िंदगी से आज़ादी दे सकती है। अब मुझे लग रहा है की मेरी ज़िन्दगी का भी कोई मकसद था! और में अपनी जिंदगी तुम्हे देकर मुक्ति पाना चाहती हूँ! "

आर्या ने उस दिव्य रोशनी की तरफ देखा और कहा, "मुझे मुक्ति चाहिए। मेरा ये शरीर , मेरी पहचान और मेरे परिवार का रसूख... मैं सब इस औरत को सौंपती हूँ।"

फिर आर्या ने अनन्या की आँखों में झाँका, "अनन्या... जाओ, अपना बदला पूरा करो। उन धोखेबाज़ों को उनके घुटनों पर लाओ। बस मेरे जाने के बाद, मेरे परिवार का ध्यान रखना... उन्हें कभी टूटने मत देना।"

अनन्या ने रुंधे गले से सिर हिलाया, "मैं वादा करती हूँ आर्या...!!"

एक ज़बरदस्त धमाके जैसी रोशनी फैली।

आर्या की आत्मा मुस्कराते हुए प्रकाश में विलीन हो गई, और अनन्या की रूह ने आर्या के शरीर में प्रवेश कर लिया।

अगले ही पल वक्त फिर से दौड़ पड़ा—भयानक टक्कर हुई। अनन्या की कार खाई में गिरकर आग के गोलों में बदल गई, जबकि आर्या की कार कुछ दूर एक पेड़ से टकराकर धुआं धुआं हो गयी और उसके अंदर बैठी 'नयी आर्या '{अनन्या } का सर स्टीयरिंग व्हील से टकराया जिससे वो बेहोश होगयी!

क्रमशः...

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