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अब शुरू होगा असली खेल...

अनन्या ने एक बार निशा की तरफ देखा, अनन्या की आँखों में एक वार्निंग साफ़ दिखाई दे जैसे कह रही हो की वो अपने पति से सवाल पूछ रही है तो उसे किसी का interfare नहीं चाहिए , फिर अचानक उसने रोहन की तरफ देख कर पूछा-, "कबीर मुझे उस रात क्या बताने वाला था? क्या वो भी इन्हीं शेयरों के बारे में जानता था?" रोहन का चेहरा बदल गया। अनन्या ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, "उसका एक्सीडेंट होना एक इत्तफाक था ...या... ?"
रोहन कुछ नहीं बोल पाया। कमरे में एक भारी खामोशी छा गई। 
निशा की आँखे गुस्से से उबल रही थी लेकिन अनन्या की नजरें रोहन से हट ही नहीं रही थी.. रोहन ने आखिरकार अनन्या की तरफ देखा और नरम लहजे मे कहा- "तुम्हारे लिए स्ट्रेस लेना ठीक नहीं है, और मेने कोनसा तुम्हे धोका दे दिया है जो मुझे गुनेहगार की तरह देख रही हो, कुछ शेयर्स अपने नाम ट्रांसफर करलिए तो तुम्हे बुरा क्यों लग रहा है, हूँ तो तुम्हारा पति ही न, इतना तो हक़ मेरा भी है तुम्हारी कंपनी पर?"
तभी निशा के मुँह से एक धीमी हसी फूटी, अनन्या और रोहन दोनों ने एक साथ निशा की तरफ देखा, रोहन ने निशा को वार्न करने की कोशिश की, कि कुछ न कहे, लेकिन निशा रोहन की बगल में आकर खड़ी हुई और रोहन की हाथ में हाथ डालते हुए बोली- "बेबी, सब शेयर्स ट्रांसफर हो चुके हैं, इसकी सब राइट्स भी , अब इसकी हमे जरूरत नहीं है, तुम क्यों इसके सामने अच्छा बनने का नाटक कर रहे हो,! "
अनन्या की आँखें सिकुड़ गईं। वो निशा की हाथ की तरफ गुस्से से देख रही थी और जो अभी अभी निशा ने कहा उसकी वजह से अनन्य समझ नहीं पा रही थी की वो खुद गुस्से में है या उसके अंदर आग लग रही है!
अनन्य ने अपने हाथों की मुठी बंद करते हुए खुद को कण्ट्रोल करते हुए निशा से कहा, "ये मजाक का वक़्त नहीं है निशा, ये हम पति पत्नी की बात है, और हम तेरे सामने बात कर रहे हैं इसका मतलबा ये नहीं नहीं है की तू हमारी बातों में दखल अंदाज़ी करेगी! "
निशा ने अब रोहन का हाथ छोड़ा और अनन्या की तरफ चलकर आयी और ठीक उसके सामने खड़ी हो गयी - "तू हमेशा से इतनी मासूम थी, अनन्या। कॉलेज में भी हर बात पर मुझ पर भरोसा करती थी और आज भी वही कर रही है।"
अनन्या ने गुस्से में काँपती आवाज़ में पूछा, "क्या कहना चाहती है तू?" निशा ने रोहन की तरफ देखा और फिर वापस अनन्या की तरफ मुड़ते हुए कहा, "तुझे समझ नहीं आ रहा क्या अब भी? अरे, ये तेरा पति तुझे धोका दे रहा था, इसको तेरी प्रॉपर्टी चाहिए थी इसीलिए तो तुझसे शादी का नाटक किया था, कॉलेज में भी जब तूने अपने स्टार्टअप के बारे में बताया था तभी से इसने तेरे साथ प्यार का नाटक शुरू कर दिया था, क्यूंकि तेरे आईडिया में भी दम था, तुझे फंडिंग भी मिल रही थी और तो और तुझमे पोटेंशियल भी था, तभी तो ...."
तभी रोहन एकदम से बिच में बोलता है- "ENough निशा! आगे एक शब्द भी नहीं"
निशा हैरानी से रोहन की तरफ देखने लगती है, और उसकी तरफ मुड़ कर कहती है-"पर क्यों? आखिर ऐसा क्या हृदयपरिवर्तन हो गया है तुम्हारा जो तुम मुझे चुप होनेके लिए बोल रहे हो? 2 दिन में कही प्यार तो नहीं हो गया तुम्हे इससे?"
निशा की बात सुनकर अनन्या के सबर का बांध टूट जाता है और उसकी आँखों से आंसू निकल जातेहै... रोहन घबरा कर अनन्या की तरफ आता है और निशा को डांटे हुए कहता है -"पागल हो क्या तुम निशा? जब में कह रहा हूँ ये सही वक़्त नहीं है ये सब बातें करने का तो तुम्हे समझ नहीं आ रहा है क्या? अनन्या माँ बनने वाली है मेरे बच्चे की और अगर तुम्हारी वजह से इसे कुछ हुआ तो में तुम्हे छोडूंगा नहीं!"
लेकिन निशा के अंदर वर्षों से जमा गुस्सा अब बाहर निकल चुका था। अनन्या की आँखें लगातार आँसुओं से भरती जा रही थीं। निशा की नजर अनन्या के पेट पर पड़ी। उसने पूछा, "एक मिनट... तू प्रेग्नेंट है?" अनन्या ने अपने पेट पर हाथ रख लिया। निशा के चेहरे पर पहले हैरानी आई और फिर उसके अंदर छिपी नफरत जैसे और गहरी हो गई।
उसने धीमे स्वर में कहा, "मतलब अब तू रोहन के बच्चे की माँ भी बनने वाली है?" अनन्या ने उसकी तरफ देखा, लेकिन कुछ कह नहीं पाई। निशा के चेहरे पर अजीब-सी कड़वाहट थी। "तुझे हमेशा सब कुछ मिलना ही था, है न? पैसा, नाम, कंपनी, प्यार... और अब ये बच्चा भी।"
रोहन ने उसे रोकते हुए कहा, "निशा, बस करो।" लेकिन निशा ने उसकी बात नहीं मानी - " क्यों बस करू में? मेने इतने सालों से इस पल का इंतज़ार किया है, जब हमारा प्लान सक्सेसफुल होगा और फिर हम खुल के मिल पाएंगे एक दूसरे के प्यार को खुल के जताएंगे, कुछ छुपाना नहीं पड़ेगा रोहन, और आज तुम मुझे धोका दे रहे हो ये बोलकर की ये माँ बनने वाली है, this is not fair रोहन शर्मा! में ये नहीं होने दूंगी! तुमसिर्फ मेरे हो और अब में तुम्हारे लिए एक पल भी इंतज़ार नहीं करुँगी !"
उसने अनन्या के सामने वे सारी बातें खोल दीं जिन्हें वह वर्षों से अपने अंदर छिपाकर बैठी थी। उसने बताया कि किस तरह वह अनन्या की सफलता से जलती थी, कैसे उसे लगता था कि अनन्या ने वह सब हासिल किया जो वास्तव में उसका होना चाहिए था और कैसे रोहन के साथ मिलकर उसने धीरे-धीरे अनन्या को अकेला करने का फैसला किया था। भले ही रोहन पहले से उसका बॉयफ्रेंड था लेकिन वो अनन्या की वजह से निशा को ज्यादा टाइम नहीं दे पता था, और रोहन का अनन्या के साथ रहना निशा को हमेशा ही खटकता था!
निशा ने एक-एक करके सब बताना शुरू कर दिया—कैसे रोहन ने अनन्या को उसके प्यार में फसाया उससे शादी की और उसका भरोसा जीता , फिर कंपनी के जरूरी दस्तावेज़ अपने कंट्रोल में लिए, कैसे CFO को पैसे देकर अपने पक्ष में किया गया, कैसे शेयर ट्रांसफर की पूरी योजना बनाई गई और कैसे बोर्ड के सदस्यों को लालच और उनकी मजबूरियों का फायदा उठाकर अपने पक्ष में किया गया।
अनन्या चुपचाप सुनती रही। उसे लग रहा था जैसे उसके सामने उसकी पूरी जिंदगी का सबसे बड़ा झूठ खुल रहा हो। लेकिन जब निशा ने कबीर का नाम लिया तो अनन्या का चेहरा अचानक सफेद पड़ गया। "कबीर?" उसने पूछा।
निशा ने कुछ पल उसे देखा और कहा, "वो हमारे रास्ते में आ गया था। उसे बहुत कुछ पता चल गया था। और शयद वो हमारा प्लान समझ गया था इसलिए उसे हटाना जरूरी था! " अनन्या की साँसें तेज हो गईं। "तो ...तुमने उसका एक्सीडेंट करवाया? तुम्हे एक इन्सान की जान ही ले ली? " इस बार निशा ने सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन उसके चेहरे पर आई खामोशी और रोहन का झुका हुआ सिर ही काफी था। अनन्या पीछे हट गई। उसकी आँखों में अब आँसू से ज्यादा डर था। जिस इंसान को वह अपना सबसे भरोसेमंद दोस्त समझती थी और जिस आदमी को अपना जीवनसाथी मानती थी, दोनों उसकी जिंदगी को अंदर से खत्म करने की साजिश कर रहे थे।
हर शब्द अनन्या के दिल में किसी चाकू की तरह उतरा था। आखिरकार उसने रोहन की तरफ देखा और बहुत धीमी आवाज़ में कहा, "मैंने तुम्हें अपना सब कुछ दिया था। अगर तुम मुझसे कंपनी माँगते तो शायद मैं बिना सवाल किए तुम्हें दे देती। लेकिन तुमने मेरा भरोसा चुना... और उसी भरोसे को मेरे खिलाफ इस्तेमाल किया।"
रोहन उसके पास आया और बोला, "अनन्या, मैं तुमसे प्यार करता हूँ।"
अनन्या ने तुरंत उसका हाथ झटक दिया। "प्यार?" उसने आँसुओं के बीच कहा, "प्यार में धोखा नहीं होता रोहन। प्यार में इंसान अपने ही साथी की पीठ पीछे उसकी जिंदगी बर्बाद करने की प्लानिंग नहीं बनाता।"
वह दरवाज़े की तरफ बढ़ गई। रोहन घबराकर उसके पीछे गया। "अनन्या, इस हालत में बाहर मत जाओ। मेरी बात सुनो।" लेकिन अनन्या ने पीछे मुड़कर उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में इतना दर्द था कि रोहन कुछ पल के लिए खुद भी चुप हो गया। "अब मुझे तुमसे कुछ नहीं सुनना," उसने कहा, "जिस घर को मैं अपना समझती थी, आज वही घर मुझे सबसे ज्यादा पराया लग रहा है। मेरे जिंदगी के दो सबसे भरोसेमंद इंसानो को मेने अपना माना था, अपनी जिंदगी मन था, लेकिन तुम दोनों ने मेरी पीठ में ऐसा खजर घोपा है कि में सोच भी नहीं सकती .... " इतना कहकर वह बाहर निकल गई। रोहन कुछ पल तक वहीं खड़ा रहा, फिर घबराकर उसके पीछे जाने लगा।
लेकिन निशा वहीं खड़ी थी।उसके चेहरे पर चिंता नहीं थी।उसकी आँखों में आँसू नहीं थे।बल्कि उसके होंठों पर एक बेहद हल्की, डरावनी मुस्कान थी।अनन्या घर से बाहर निकल चुकी थी और रोहन उसके पीछे भाग रहा था। निशा ने खिड़की से दोनों को जाते हुए देखा और बहुत धीमे से अपने आप से कहा, "अब शुरू होगा असली खेल..."
उसे नहीं पता था कि उसी समय शहर के एक अस्पताल में एक डॉक्टर एक घायल मरीज की रिपोर्ट देख रहा था। मरीज को कुछ देर पहले ही जंगल के रास्ते से लाया गया था। डॉक्टर ने फाइल बंद की और नर्स से कहा, "मरीज की हालत अभी भी गंभीर है, लेकिन अब खतरा थोड़ा कम है। होश आते ही उसके परिवार को खबर करना।"
फाइल पर नाम लिखा था—
कबीर मल्होत्रा।
कबीर जिंदा था।और अगर वह होश में आ गया...तो काफी कुछ पलट सकता है !!
क्रमशः...

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