
नई सुबह हमेशा अपने साथ एक नई उम्मीद लेकर आती है, लेकिन उस सुबह किसी को नहीं पता था कि दिन खत्म होते-होते कुछ लोगों की जिंदगी में ऐसा तूफान आने वाला है, जिसके बाद उनके रिश्ते पहले जैसे कभी नहीं रहेंगे। Bali की उस सुबह सूरज की हल्की सुनहरी रोशनी होटल के कमरे की बड़ी-बड़ी खिड़कियों से अंदर आ रही थी। अनन्या की आँखें धीरे-धीरे खुलीं तो कुछ सेकंड तक वह बिना हिले बस छत को देखती रही। पिछली रात उसके मन में बसी खुशी अब भी वैसी ही थी। वह माँ बनने वाली थी। उसके अंदर एक नई जिंदगी पल रही थी और शायद यही वजह थी कि पिछले कई दिनों से उसके मन पर छाया तनाव कुछ समय के लिए थोड़ा कम हो गया था। लेकिन जैसे ही उसे कबीर याद आया, उसके चेहरे की मुस्कान थोड़ी फीकी पड़ गई। उसने बगल में देखा तो रोहन पहले ही उठ चुका था और खिड़की के पास खड़ा अपने फोन में कुछ देख रहा था।
"गुड मॉर्निंग," अनन्या ने धीमी आवाज़ में कहा।
रोहन ने तुरंत फोन स्क्रीन बंद कर दी और उसकी तरफ देखकर मुस्कुराने की कोशिश की। "गुड मॉर्निंग... नींद कैसी रही?" उसने पूछा तो अनन्या ने हल्का सा सिर हिलाते हुए कहा, "ठीक थी। बहुत दिनों बाद शायद बिना किसी मीटिंग और काम की टेंशन के सोई हूँ।" रोहन ने मुस्कुराते हुए कहा, "इसीलिए तो तुम्हें यहाँ लाया था। तुम्हें थोड़ा ब्रेक चाहिए था।" अनन्या कुछ पल उसे देखती रही।
दोनों के बीच कल रात हुई बातचीत कहीं न कहीं अब भी मौजूद थी। जब उसने काम जारी रखने की बात की थी तो रोहन के चेहरे पर आई नाराज़गी उसे याद थी, और शायद रोहन को भी उसका उदास चेहरा याद था। दोनों ही सामान्य रहने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनके बीच एक हल्की-सी awkwardness थी जिसे दोनों महसूस कर रहे थे, बस कोई उसके बारे में बात नहीं करना चाहता था।
"आज कितने बजे की फ्लाइट है?" अनन्या ने बात बदलते हुए पूछा। रोहन ने कहा, "बारह बजे की है, इसलिए हमें ज्यादा देर नहीं करनी चाहिए।" अनन्या उठकर तैयार होने लगी। कपड़े निकालते हुए उसने अचानक कहा, "घर पहुँचकर मुझे मीरा से भी बात करनी है। उसने कई बार फोन किया था। पता नहीं ऑफिस में क्या चल रहा होगा।" मीरा का नाम सुनते ही रोहन के चेहरे पर एक पल के लिए तनाव आया, लेकिन उसने उसे छिपाते हुए सामान्य आवाज़ में कहा, "घर पहुँचकर आराम से बात कर लेना। अभी तुम बस अपनी तबीयत का ध्यान रखो।" अनन्या ने उसकी तरफ देखा और बोली, "मैं रख रही हूँ, लेकिन ऑफिस की सारी चीज़ें भी तो नहीं छोड़ सकती।" रोहन ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने बस अपना सामान उठाया और पैक करने लगा। उसे अच्छी तरह पता था कि इंडिया पहुँचने के बाद सबसे बड़ा खतरा यही था कि अनन्या को कंपनी के बारे में सच्चाई पता चल सकती थी।
उधर शहर से बहुत दूर, घने जंगल के बीच बनी उस छोटी-सी झोपड़ी में रात कुछ अलग ही गुजरी थी। कबीर की हालत कई घंटों तक गंभीर रही थी, लेकिन आधी रात के बाद उसकी उँगलियों में हल्की सी हरकत हुई और धीरे-धीरे उसकी आँखें खुल गईं। उसे कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था। सिर में तेज दर्द था और पूरा शरीर ऐसा लग रहा था जैसे किसी भारी चीज़ ने कुचल दिया हो। उसने उठने की कोशिश की तो दर्द से उसके मुँह से कराह निकल गई। पास बैठी बूढ़ी औरत तुरंत उसकी तरफ आई और बोली, "धीरे... अभी उठने की कोशिश मत करो। तुम्हारी हालत बहुत खराब है।" कबीर ने कुछ पल उसे देखा, फिर मुश्किल से पूछा, "मैं... कहाँ हूँ?" बूढ़े आदमी ने पास आकर बताया कि वह उसे तीन दिन पहले नदी के किनारे बेहोशी की हालत में मिला था। पानी के किनारे बुरी तरह घायल पड़ा था। उन्होंने उसे मरने के लिए छोड़ने के बजाय अपनी झोपड़ी में लाकर उसका इलाज किया था।
कबीर ने आँखें बंद कीं और धीरे-धीरे पिछली रात की घटनाएँ उसकी याददाश्त में लौटने लगीं। उसे अपनी कार याद आई, पीछे से आती तेज रोशनी याद आई, अचानक हुआ जोरदार टक्कर का झटका याद आया और फिर वह अंधेरा... लेकिन उसके दिमाग में सबसे ज्यादा एक ही चेहरा था—अनन्या।
उसे अचानक याद आया कि वह अनन्या को रोहन और निशा की सच्चाई बताने जा रहा था। उसने घबराकर उठने की कोशिश की और बोला, "मुझे जाना होगा... मुझे अनन्या के पास जाना है।" बूढ़े आदमी ने उसे रोकते हुए कहा, "तुम अभी अपने पैरों पर खड़े तक नहीं हो सकते। इतनी चोटों के साथ जंगल से बाहर जाने की कोशिश करोगे तो रास्ते में ही जान जा सकती है।" लेकिन कबीर उसकी बात सुनने की स्थिति में नहीं था। उसने कहा, "अगर मैं नहीं गया तो उसकी जान खतरे में पड़ सकती है।" बूढ़ी औरत ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन कबीर के मन में सिर्फ़ एक बात थी—उसे किसी भी हालत में अनन्या तक पहुँचना है।
कुछ देर बाद जब बूढ़ा दंपती झोपड़ी के दूसरे हिस्से में चला गया तो कबीर ने किसी तरह बिस्तर से उठने की कोशिश की। दर्द से उसका पूरा शरीर काँप रहा था, लेकिन उसने खुद को संभाला और धीरे-धीरे झोपड़ी से बाहर निकल गया। उसे खुद नहीं पता था कि किस दिशा में जाना है, लेकिन उसे उम्मीद थी कि जंगल के बाहर कोई सड़क जरूर मिलेगी। वह लड़खड़ाते हुए चलता रहा। कभी पेड़ों का सहारा लेता, कभी जमीन पर गिर जाता, लेकिन हर बार उठकर आगे बढ़ता।
लगभग चार घंटे तक वह किसी तरह जंगल के बीच भटकता रहा और आखिरकार उसे दूर एक सड़क दिखाई दी। सड़क देखते ही उसे लगा जैसे उसकी सारी थकान कुछ देर के लिए खत्म हो गई हो। उसने हाथ उठाकर आने वाली गाड़ियों को रोकने की कोशिश की। कुछ देर बाद एक कार उसके पास आकर रुकी। ड्राइवर ने उसकी हालत देखकर पूछा, "आप ठीक हैं? अस्पताल जाना है?" कबीर ने मुश्किल से कहा, "शहर जाना है... मुझे अनन्या शर्मा के घर जाना है। बहुत जरूरी है।" ड्राइवर ने उसकी हालत देखकर उसे पीछे बैठा लिया, लेकिन गाड़ी कुछ ही दूर चली थी कि कबीर का सिर एक तरफ झुक गया और वह फिर बेहोश हो गया। ड्राइवर ने पीछे मुड़कर देखा तो उसकी हालत देखकर घबरा गया। उसने तुरंत गाड़ी अस्पताल की तरफ मोड़ दी।
इधर दोपहर के करीब अनन्या और रोहन की फ्लाइट लैंड कर चुकी थी। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही अनन्या की नजर सामने खड़ी मीरा पर पड़ी। मीरा काफी देर से उसका इंतजार कर रही थी और उसके चेहरे पर ऐसी बेचैनी थी जिसे देखकर अनन्या समझ गई कि बात सिर्फ़ ऑफिस के किसी छोटे-मोटे काम की नहीं थी। मीरा ने आगे बढ़कर कहा, "मैम, मुझे आपसे बहुत जरूरी बात करनी है।"
रोहन तुरंत बीच में आया और बोला, "मीरा, अनन्या अभी बहुत थकी हुई है। घर चलकर बात कर लेना।" लेकिन मीरा ने उसकी तरफ देखते हुए कहा, "सर, मुझे लगता है कि मैम को अभी यह बात पता होनी चाहिए।" अनन्या ने दोनों को देखा और पूछा, "क्या हुआ मीरा?" मीरा ने कुछ सेकंड हिचकिचाने के बाद कहा, "मैम... कंपनी के शेयरों के बारे में कुछ ऐसा हुआ है जो आपको जानना बहुत जरूरी है।"
अनन्या ने हैरानी से पूछा, "क्या?" मीरा ने अपनी आवाज़ धीमी करते हुए कहा, "आपके शेयरों का एक बड़ा हिस्सा रोहन सर के नाम ट्रांसफर हो चुका है। बोर्ड के कई मेंबर्स ने भी अप्रूवल दे दिया है।" यह सुनते ही अनन्या कुछ पल के लिए बिल्कुल शांत हो गई। उसे लगा शायद उसने गलत सुना है। उसने धीरे से रोहन की तरफ देखा। रोहन की आँखों में अब वह आत्मविश्वास नहीं था जो कुछ मिनट पहले तक था। अनन्या ने काँपती आवाज़ में पूछा, "रोहन... ये क्या कह रही है?" रोहन उसके करीब आया और बोला, "अनन्या, मेरी बात सुनो।" लेकिन अनन्या ने उसकी बात काटते हुए कहा, "पहले सिर्फ़ इतना बताओ कि क्या मीरा सच कह रही है?" रोहन कुछ पल चुप रहा और उसकी वही चुप्पी अनन्या के लिए जवाब बन गई।
उसकी आँखों में आँसू भर आए। "तुमने मेरे पीछे मेरी कंपनी के शेयर अपने नाम करवा लिए?" उसने पूछा। रोहन ने खुद को संभालते हुए कहा, "मैंने ये सब तुम्हारे खिलाफ नहीं किया। मैं तुम्हारी मदद करना चाहता था। तुम पिछले कुछ समय से बहुत तनाव में थीं और मैं चाहता था कि कंपनी की जिम्मेदारी का कुछ हिस्सा मैं संभाल लूँ।" अनन्या ने उसकी तरफ देखते हुए कड़वी हँसी हँसी और कहा, "मेरी मदद? तुम्हें मेरी कंपनी चाहिए थी तो मुझसे माँग लेते रोहन। मैं तुम्हें खुशी-खुशी दे देती। तुमने मुझसे छिपाकर ये सब करने की जरूरत क्यों समझी?" रोहन के पास उस सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं था। उसने बस इतना कहा, "यहाँ बात करना ठीक नहीं है। घर चलो, मैं तुम्हें सब कुछ समझाऊँगा।" अनन्या ने मीरा की तरफ देखा और कहा, "तुम ऑफिस जाओ। मुझे सब रिकॉर्ड चाहिए। मैं तुमसे बाद में बात करूँगी।" मीरा ने सिर हिलाया और चली गई, लेकिन जाते समय उसकी नजर रोहन पर जरूर गई। अब उसे साफ समझ आ चुका था कि मामला बहुत गंभीर था।
घर पहुँचते ही अनन्या ने बिना समय गंवाए रोहन से जवाब माँगना शुरू कर दिया। तभी उसकी नजर निशा पर पड़ी, जो पहले से घर में मौजूद थी। निशा ने उसे देखकर सामान्य बनने की कोशिश की, लेकिन अनन्या के चेहरे पर मौजूद सवाल देखकर उसकी मुस्कान भी धीरे-धीरे गायब हो गई।
अनन्या ने रोहन की तरफ देखते हुए कहा, "अब मुझे सब सच चाहिए। एक भी झूठ नहीं। तुमने शेयर अपने नाम क्यों करवाए? और करवाए तो भी तुम्हे मेरे पीछे se ये सब करने की जरूरत क्यों पड़ी? " रोहन ने उसे शांत करने की कोशिश की, लेकिन अनन्या अब शांत होने वाली नहीं थी। उसके मन में मीरा की बातें और कबीर का आखिरी मैसेज एक साथ घूम रहे थे।
निशा ने बिच में ही कूदते हुए एकदम से कहा - "जब तुम्हे कोई प्रॉब्लम नहीं है तो इतना overreact क्यों कर रही हो?"
अनन्या ने एक बार निशा की तरफ देखा, अनन्या की आँखों में एक वार्निंग साफ़ दिखाई दे जैसे कह रही हो की वो अपने पति से सवाल पूछ रही है तो उसे किसी का interfare नहीं चाहिए , फिर अचानक उसने रोहन की तरफ देख कर पूछा-, "कबीर मुझे उस रात क्या बताने वाला था? क्या वो भी इन्हीं शेयरों के बारे में जानता था?" रोहन का चेहरा बदल गया। अनन्या ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, "उसका एक्सीडेंट होना एक इत्तफाक था ...या... ?"
क्रमशः ....




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