
उसी समय कंपनी से कुछ दूर एक आलीशान रेस्टोरेंट के प्राइवेट लाउंज में निशा बैठी थी। उसके सामने कंपनी के दो बोर्ड मेंबर्स बैठे थे।
निशा ने मुस्कुराते हुए कहा,- "आप दोनों समझदार लोग हैं। मैं बस चाहती हूँ कि आप कंपनी के भविष्य के बारे में सोचें।"
एक बोर्ड मेंबर ने गंभीर आवाज़ में कहा,- "हमें दस्तावेज़ों की पूरी जानकारी चाहिए।"
निशा ने फाइल उनकी तरफ बढ़ाई- "सब कुछ लीगल तरीके से हुआ है।"
दूसरे बोर्ड मेंबर ने पूछा,- "लेकिन पहले मीटिंग होती है, शेयरहोल्डर announce करता है और उसके बाद सभी बोर्ड मेंबर्स की सहमति से शेयर्स ट्रांसफर होते हैं, और अनन्या के शेयर्स ट्रांसफर हुए हैं, भले ही उसके साइन है लेकिन हम उसे सालों से जानते हैं, उसने कंपनी के लिए बहुत कुछ किया है आखिर वो अपने शेयर्स ऐसे ही किसी के नाम क्यों कर देगी वो भी बिना बोर्ड मेंबर्स की मंज़ूरी के ?"
निशा ने मुस्कुराकर कहा - "अनन्या ने ये शेयर्स रोहन यानि अपने पति को दिए हैं। न की किसी ऐरे गेरे आदमी को, आप अनन्या पर कैसे सवाल उठा सकते हैं ?पिछले कुछ टाइम में आप लोग रोहन की मेहनत देख ही रहे हो, कंपनी को कितने बड़े प्रोजेक्ट मिले हैं रोहन की वजह से! "
फिर उसने धीरे से कहा- " वैसे भी... रोहन कंपनी के लिए और बड़े निवेश लाने वाला है।"
उसने टेबल पर एक और दस्तावेज़ रखा।
"आपके लिए भी इसमें फायदा है।"
पहले बोर्ड मेंबर ने दस्तावेज़ देखा।
"कितना फायदा?"
निशा ने सिर्फ़ मुस्कुराकर कहा,-"जितना आप सोच भी नहीं सकते।"
दूसरा बोर्ड मेंबर चुप रहा।निशा ने उसकी भी कमजोरी पहचान ली थी ।
"आपके बेटे की कंपनी पर जो कर्ज़ है... अगर वो अगले महीने तक नहीं चुका, तो बैंक उसकी कंपनी को अपने कब्जे में ले सकता है।"
वह आदमी अचानक उसकी तरफ देखने लगा।
"आपको ये सब कैसे पता?"
"हमारे पास जानकारी है।"
निशा आगे झुकी।
"आप सिर्फ़ एक मंज़ूरी दीजिए। बाकी परेशानी हम संभाल लेंगे।"
कुछ देर की खामोशी के बाद उस बोर्ड मेंबर ने दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर कर दिए।
निशा मुस्कुरा दी।
दो और वोट उसके पक्ष में थे । लगभग सभी बोर्ड मेंबर्स को निशा ने या तो फंसकर या किसी न किसी चीज का लालच देकर या उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें अपनी तरफ कर लिया था!
उसने मन ही मन सोचा—"अनन्या हम लोग हमारे मकसद के एक कदम और पास पहुंच गए हैं! "
...
Bali...समुद्र की नीली लहरें, होटल की खूबसूरत रोशनी और चारों तरफ़ घूमते पर्यटक...सब कुछ बेहद खूबसूरत था।लेकिन अनन्या का मन कहीं और था।
वह होटल की बालकनी में खड़ी समुद्र को देख रही थी।
रोहन पीछे से आया।
"यहाँ आकर भी परेशान हो?"
अनन्या ने धीरे से कहा,- "मुझे कबीर की चिंता हो रही है।"
रोहन उसके पास आकर खड़ा हो गया- "वो मिल जाएगा।"
अनन्या ने उसकी तरफ देखा-"तुम्हें सच में ऐसा लगता है?"
"हाँ।"- रोहन ने उसके माथे को चूमा- "तुम मुझ पर भरोसा करती हो न?"
अनन्या ने बिना कुछ सोचे सिर हिला दिया- "बहुत।"
रोहन के चेहरे पर मुस्कान आ गई, उसे पता नहीं था कि यही भरोसा उसकी सबसे बड़ी ताकत भी था...और सबसे बड़ा खतरा भी।
...
उधर निशा का फोन लगातार बज रहा था।उसने कॉल उठाई।
"हाँ?"
"एक और बोर्ड मेंबर तैयार है।"
निशा की आँखों में चमक आ गई।
"बहुत अच्छा।"
"लेकिन वो कुछ ज्यादा मांग रहा है।"
"उसे जो चाहिए दे दो।"
"अगर रोहन को पता चला?"
निशा मुस्कुराई।
"रोहन को सिर्फ़ उनकी 'yes' चाहिए।"
उसने फोन काट दिया।
उसके सामने बोर्ड की नई वोटिंग रिपोर्ट पड़ी थी।
एक-एक करके सभी रास्ते साफ़ हो रहे थे।
और फिर आखिरकार...वह दिन आ गया।बोर्ड की special meeting हुई।अनन्या उस मीटिंग में मौजूद नहीं थी। मीरा ने फिर से अनन्या को कांटेक्ट करने की कोशिश की, लेकिन कॉल रोहन ने उठाया ....दरअसल जब रोहन को पता चला की बोर्ड मेंबर्स की मीटिंग होने वाली है तो रोहन ने अनन्या के खाने में नींद की दवा मिला दी थी.. जिससे अनन्या सो गयी और जब मीटिंग चल रही थी तब रोहन ने वीडियो कॉल के थ्रू वो मीटिंग ज्वाइन करके सबको अनन्या की तबियत खराब होने की बात बताई...
रोहन की तरफ से पेश किए गए डाक्यूमेंट्स पर चर्चा हुई।कुछ सवाल उठे।कुछ लोगों ने विरोध किया।लेकिन जिन लोगों को निशा ने अपने पक्ष में कर लिया था, वे एक-एक करके रोहन के समर्थन में खड़े हो गए। अंततः निर्णय हुआ।
रोहन शर्मा कंपनी का सबसे बड़ा व्यक्तिगत शेयरहोल्डर बन चुका था।
जब यह खबर रोहन तक पहुँची...
वह Bali के होटल की बालकनी में खड़ा था।
उसने फोन देखा।
उसके चेहरे पर धीमी मुस्कान फैल गई।
"अब ये कंपनी मेरी है।"
लेकिन अगले ही पल उसके दिमाग में एक और विचार आया।
अनन्या।
जब तक अनन्या जिंदा थी...वह कभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं था। उसके पास अब भी कंपनी के पुराने रिकॉर्ड थे।कानूनी अधिकार थे।और अगर कभी उसे सब कुछ पता चल गया...तो वह रोहन को बर्बाद कर सकती थी।रोहन ने बालकनी से नीचे देखा। उसकी आँखों में एक खतरनाक फैसला बनने लगा।
"शायद अब अनन्या को भी रास्ते से हटाना पड़ेगा।"
लेकिन तभी उसके फोन पर एक मैसेज आया। रोहन ने स्क्रीन देखी। मैसेज एक मेडिकल सेंटर से था। नींद से जागने के बाद अनन्या की तबियत सच में बिगड़ गयी थी, उसे वोमिटिंग्स हो रही थी और चक्कर आ रहे थे इसलिए, रोहन ने उसका मेडिकल चेकउप करवाया था...
"Congratulations, your wife is pregnant."
रोहन की उँगलियाँ वहीं रुक गईं।
उसने दोबारा मैसेज पढ़ा।फिर उसकी नज़र अनन्या की तरफ गई।वह कुछ दूरी पर खड़ी समुद्र को देख रही थी। रोहन के चेहरे पर पहले हैरानी आई...फिर एक धीमी मुस्कान। उसने मोबाइल अपनी मुट्ठी में बंद कर लिया। अनन्या उसके बच्चे की माँ बनने वाली थी।
और अब...
अनन्या को खत्म करने का उसका फैसला उतना आसान नहीं था।
लेकिन क्या रोहन के अंदर अचानक इंसानियत जागी थी?
या...
उसके दिमाग में अब अनन्या और उसके होने वाले बच्चे को लेकर कोई और भी खतरनाक योजना जन्म ले रही थी?
क्रमशः...




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