
रात के करीब ग्यारह बजे अनन्या अपने स्टडी रूम में बैठी कबीर का इंतज़ार कर रही थी।उसने घड़ी देखी।
"इतनी देर क्यों हो गई?"
उसने कबीर को फोन लगाया। फोन नहीं उठा। लगभग 1 घंटे बाद फिर फोन किया।इस बार भी कोई जवाब नहीं।अनन्या के मन में हल्की चिंता होने लगी।अनन्या अब बार बार कॉल करने लगी तभी किसी ने फ़ोन उठाया !
"हैलो?"
दूसरी तरफ़ पुलिस की आवाज़ थी।
"जी...मैं इंस्पेक्टर सुभाष! ये फ़ोन जिस गाडी में था उसका एक्सीडेंट हो चूका है और गाडी खाई में मिली है, गाडी के नंबर से पता चला है की ये गाडी कबीर मल्होत्रा के नाम पर थी, क्या आप उन्हें जानती हैं? "
अनन्या के हाथ से फोन लगभग छूट गया।
"क्या...?कबीर? "
उसकी आवाज़ काँपने लगी।
"कबीर ठीक है?"
दूसरी तरफ़ कुछ सेकंड की चुप्पी रही।
"कार खाई में गिरी है। लेकिन अभी तक व्यक्ति की बॉडी नहीं मिली है।"
अनन्या की आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा।
"नहीं..."
उसने कुर्सी पकड़ ली।
"नहीं... ये नहीं हो सकता। वो मेरे घर आ रहा था। उसने मुझे मैसेज किया था।"
रोहन तुरंत कमरे में आया।
"क्या हुआ?"
अनन्या ने काँपते हाथों से फोन उसकी तरफ बढ़ाया।
"कबीर..."
रोहन ने फोन लिया। उसने पूरी बात सुनी।फिर अनन्या को संभालते हुए बोला,
"पहले शांत हो जाओ। हो सकता है वो मिल जाए।"
लेकिन उसके अंदर...एक अजीब-सी राहत थी।कबीर अब अनन्या तक नहीं पहुँच सकता था। कम से कम अभी नहीं।
...
अगली सुबह अनन्या की आँखों में नींद नहीं थी। वह पूरी रात कबीर के बारे में सोचती रही।
उसके मन में बार-बार वही सवाल घूम रहा था— कबीर आखिर मुझे क्या बताने वाला था?
ऐसा भी क्या अर्जेंट था की वो रात में घर आ रहा था? उसने मैसेज में कंपनी का जिक्र क्यों किया था? अनन्या ने रोहन की तरफ देखा।
"मुझे Bali नहीं जाना।"
रोहन कुछ पल चुप रहा।
"क्या?"
"जब तक कबीर का पता नहीं चलता, मैं कहीं नहीं जाऊँगी।"
यही वह बात थी, जिससे रोहन डर रहा था।उसने अनन्या का हाथ पकड़ लिया। रात को भी अनन्या ने एक्सीडेंट वाली जगह जाने की बहुत ज़िद की थी लेकिन राहुल ने उसे नहीं जाने दिया था!
"मैं समझ सकता हूँ कि तुम परेशान हो। लेकिन वहाँ पुलिस अपना काम कर रही है। हमें अभी कुछ पता भी नहीं कि कबीर के साथ असल में क्या हुआ।"
"फिर भी..."
"अनन्या, तुम पिछले कई दिनों से लगातार काम कर रही हो।"
रोहन ने बेहद शांत आवाज़ में कहा,-"तुम्हें थोड़ा दूर जाना चाहिए। दो दिन के लिए ही तो है। मैं तुम्हारे साथ हूँ।"
अनन्या ने सिर हिला दिया।
"लेकिन मेरा मन..."
"अगर तुम यहीं रहोगी तो हर घंटे यही सोचती रहोगी। वहाँ जाकर थोड़ा आराम करोगी तो शायद तुम्हारा दिमाग भी शांत होगा।"
अनन्या कुछ नहीं बोली। रोहन ने आखिरी दाँव खेला।
"और तुमने मुझसे वादा किया था।"
अनन्या ने उसकी तरफ देखा।उसे याद आया कि यह ट्रिप उसी ने प्लान की थी।कुछ देर बाद उसने धीरे से कहा,- "ठीक है... चलते हैं।"
रोहन के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
"बस यही तो चाहता था।"
लेकिन अनन्या ने उस मुस्कान को गौर से नहीं देखा। वह खिड़की की तरफ देखने लगी। उसके मन में अब भी कबीर की आवाज़ गूँज रही थी—
"you need to know something...."
और दूसरी तरफ...
रोहन अपने फोन पर एक मैसेज पढ़ रहा था।"हमने काम कर दिया है , लेकिन कबीर की बॉडी पता नहीं कहा है, अगर हमने और ढूंढने की कोशिश की तो पकडे जा सकते है, वहा अब पुलिस की पहरेदारी है इसलिए अब शहर से बहार जा रहे हैं!"
रोहन ने मैसेज डिलीट किया।फिर उसने अनन्या की तरफ देखा।वह खिड़की के पास खड़ी थी।
उसके चेहरे पर चिंता थी।रोहन ने मन ही मन कहा—"बस दो दिन और, अनन्या...फिर तुम्हे भी कबीर के पास ही भेज दूंगा और तुम उससे मिलके ही पूछ लेना की वो कैसा है! " रोहन के चेहरे पर एक शैतानी मुस्कराहट थी!
......
सुबह करीब नौ बजे अनन्या और रोहन एयरपोर्ट के लिए निकल गए। उनकी फ्लाइट शाम की थी लेकिन अनन्या अपना ध्यान हटाना चाहती थी इन सब से इसलिए रोहन उसे उसके कहने पर शिव मंदिर लेकर गया जहा अनन्या काफी देर तक भोलेनाथ के शिवलिंग के सामने बैठी रही !!
अनन्या ने जाते समय अपने घर की तरफ एक लंबी नज़र डाली। पता नहीं क्यों, आज उसे अपना ही घर कुछ अजनबी-सा लग रहा था।रोहन ने ड्राइविंग सीट से उसकी तरफ देखा।
"तुम्हें खुद को थोड़ा संभालना होगा।"
अनन्या ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा,- "पता नहीं अजीब सी बेचैनी है"
रोहन ने तुरंत जवाब नहीं दिया।फिर बोला, "कोई नहीं, तुम्हारा मंदिर जाने का मन है तो शयद वह बैठकर तुम्हे अच्छा लगे "
अनन्या चुप हो गई।
...
उधर कंपनी के ऑफिस में मीरा बेचैनी से अपने केबिन में बैठी थी। उसने अनन्या को कई बार फोन किया था। कोई जवाब नहीं।
उसने फिर कॉल किया।
इस बार भी फोन नहीं उठा।
मीरा ने अपने सामने पड़ी फाइल खोली।
उसमें कंपनी की नई शेयरहोल्डिंग रिपोर्ट थी।
उसने रोहन का नाम देखा और उसका दिल बैठ गया।
Rohan Sharma — Major Shareholder
मीरा को अब यकीन हो चुका था कि मामला गंभीर है।
उसने तुरंत अनन्या को वीडियो कॉल की।
इस बार कॉल उठ गई।
स्क्रीन पर अनन्या दिखाई दी।
पीछे एयरपोर्ट का लाउंज था।
"मैम!"
मीरा की आवाज़ में घबराहट थी।
"मुझे आपसे बहुत जरूरी बात करनी है।"
अनन्या ने थकी हुई आवाज़ में पूछा,
"क्या हुआ मीरा?"
मीरा कुछ कहती, उससे पहले रोहन ने बीच में कहा,
"मीरा, अगर ऑफिस की बात है तो बाद में करना। अभी अनन्या की तबीयत ठीक नहीं है।"
मीरा ने रोहन की तरफ देखा।
"सर, लेकिन ये बहुत जरूरी है। मुझे मैडम से बात करने दीजिये ! "
"कितनी जरूरी?"
मीरा समझ चुकी थी की रोहन ने अनन्या के साथ धोका किया है और अनन्या को ये बताना बहुत जरूरी है! उसने बिना रोहन की परवाह किये बोलने ki कोशिश की- "मेम ...वो शेयर—"
रोहन ने तुरंत बात काट दी। उसके अचानक बोलने से मीरा भी एक पल चुप हो गयी और अनन्य भी रोहन की तरफ देखने लगी, फिर उसमे मीरा की तरफ देखते हुए कहा- "मीरा, जो भी है, तुम रोहन को बता दो।"
मीरा ने कुछ पल रोहन की तरफ देखा।
फिर बोली- "मैम... मुझे आपसे अकेले में बात करनी है।"
रोहन के चेहरे पर तनाव आ गया। उसने अनन्य की तरफ देखा और कहा- "फ्लाइट का टाइम हो रहा है"
अनन्या- "मीरा, अभी कोई जरूरत नहीं है। जो भी है तुम देख लो और 2 दिन tum सब संभाल लो, 2 दिन बाद बात करते हैं!"
तभी रोहन ने फोन अपने हाथ में ले लिया।और बिना मीरा को जवाब देने का मौका दिए उसने कॉल काट दी।अनन्या ने उसे देखा। अनन्या ने कुछ नहीं कहा।वह फिर से चुपचाप बैठ गई।
मीरा दूसरी तरफ़ स्क्रीन को देखती रह गई।अब उसे यकीन होने लगा था कि कुछ बहुत गलत था।
क्रमश: ...




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