
पिछली रात मिली उस अनजान कॉल के बाद रोहन काफी देर तक अपने स्टडी रूम में बैठा रहा। फोन अब भी उसके हाथ में था और उसकी स्क्रीन पर वही अनजान नंबर दिखाई दे रहा था। कॉल करने वाला कौन था, यह वह नहीं जानता था, लेकिन एक बात साफ थी—किसी को उसके प्लान के बारे में पता चल गया है और उस पर शयद नजर भी रखे हुए है!
"ये जो कोई भी है खतरा तो मुझे इससे भी हो सकता है लेकिन फ़िलहाल मुझे उस खतरे से बचना होगा जो वाकई में मेरे लिए खतरा है! आखिर कौन हो सकता है ऐसा इंसान ....जिससे मुझे खतरा हो... अनन्या को भी जानता हो और उससे रिलेटेड हो...दोस्त तो उसकी सिर्फ निशा है, उसके अलावा वो सिर्फ क्लाइंट्स एंड कंपनी के स्टाफ से मिलती है! और क्लाइंट्स को तो में ऑलमोस्ट जानता ही हूँ, ज्यादातर को तो मेने अपनी तरफ कर भी लिया है! यानी स्टाफ में कोई ऐसा डेढ़ श्याना है जिसको खुजली है...."
रोहन ने कुछ पल तक सोचा और फिर फोन टेबल पर रख दिया। रोहन को अचानक एक बात याद आती है जब आज बातों बातों में अनन्या ने जिक्र किया की कबीर ने उससे हर डॉक्यूमेंट को क्रॉस चेक करने को कहा था और सावधान रहने को..
"कबीर..."
उसने धीरे से नाम ये नाम कहा, जैसे इसके साथ कोई पुरानी याद भी जुड़ी हो...
अब तक वह कबीर को सिर्फ़ कंपनी का लीगल एडवाइज़र समझता था। एक ऐसा आदमी जो अपने काम तक सीमित रहता है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में कबीर की बदलती निगाहों को रोहन ने notice कर लिया था कि यह आदमी सिर्फ़ फाइलें नहीं देख रहा, बल्कि उसके काम करने के तरीके को भी समझने की कोशिश कर रहा है।
रोहन कुर्सी से उठा और कमरे की खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया।
शहर की रोशनी दूर तक फैली हुई थी।
कभी-कभी किसी बड़े खेल में सबसे खतरनाक दुश्मन वह नहीं होता जो आपके सामने खड़ा हो, बल्कि वह होता है जो चुपचाप आपको समझने की कोशिश कर रहा हो।
और अब रोहन समझ चुका था कि कबीर वही खतरा बन सकता है, उसने तुरंत अपने फोन से एक नंबर मिलाया।
"कल सुबह मुझे CFO से अकेले में मिलना है। किसी को पता नहीं चलना चाहिए।"
दूसरी तरफ़ से कुछ पूछा गया।
रोहन ने शांत आवाज़ में कहा,- "वक्त आ गया है कि कंपनी के अंदर कुछ चीज़ें हमारे हिसाब से चलने लगें।"
फोन कट गया। उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।
अनन्या को अभी भी लगता था कि उसका सबसे बड़ा सहारा उसका पति है। उसे क्या पता था कि उसी भरोसे का इस्तेमाल करके रोहन उसकी पूरी दुनिया की नींव हिला रहा था।
...
अगली सुबह कंपनी में सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था। अनन्या हमेशा की तरह समय पर ऑफिस पहुँची। मीरा उसके लिए दिनभर की मीटिंग्स का शेड्यूल लेकर खड़ी थी।
"मैम, दस बजे इन्वेस्टर्स के साथ मीटिंग है। उसके बाद दोपहर में फाइनेंस रिव्यू और शाम को बोर्ड की इंटरनल मीटिंग।"
अनन्या ने फाइल लेते हुए पूछा,
"फाइनेंस रिव्यू में CFO भी रहेंगे?"
"जी मैम।"
"ठीक है।"
उसी समय रोहन भी केबिन में आ गया।
"गुड मॉर्निंग।"
अनन्या ने मुस्कुराकर उसकी तरफ देखा।
"गुड मॉर्निंग। आज बहुत जल्दी आ गए?"
"कुछ काम था।"
रोहन ने सामान्य अंदाज़ में कहा।
अनन्या ने कुछ नहीं पूछा।
लेकिन रोहन की निगाह एक पल के लिए मीरा पर गई।
फिर वह अनन्या की तरफ मुड़ा।
"आज फाइनेंस की मीटिंग है न?"
"हाँ।"
"अगर चाहो तो मैं भी बैठ जाऊँ। पिछले कुछ दिनों से कुछ फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स देख रहा हूँ, तो शायद मदद हो जाए।"
अनन्या ने बिना किसी शक के सिर हिला दिया।
"ठीक है।"
रोहन ने मुस्कुराकर कहा, - "फिर मैं तुम्हारे साथ चलता हूँ।"
उसे क्या पता था कि यह मीटिंग सिर्फ़ कंपनी के हिसाब-किताब की नहीं, बल्कि उसके पूरे साम्राज्य पर पहला दाँव लगाने की शुरुआत थी।
...
दोपहर से कुछ पहले CFO का केबिन।
दरवाज़ा बंद था। अंदर रोहन और कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी(CFO), विकास मेहरा, आमने-सामने बैठे थे।
विकास पिछले सात वर्षों से कंपनी के साथ था। उसने अनन्या के साथ कंपनी को बढ़ते हुए देखा था और जानता था कि अनन्या उसे कितना भरोसेमंद मानती है।
इसी वजह से वह आज असहज था।
उसने धीरे से कहा, "सर, मुझे नहीं लगता कि हमें यह करना चाहिए।"
रोहन ने उसकी तरफ देखा- "तुम्हें क्या लगता है, विकास?"
विकास- "मैम को अगर पता चला कि उनके बिना कुछ शेयर ट्रांसफर करने की तैयारी हो रही है, तो..."
विकास की आवाज़ धीमी पड़ गई। रोहन कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा। फिर उसने अपनी जेब से एक लिफाफा निकाला और टेबल पर रख दिया। लिफाफा देखते ही विकास की निगाहें वहीं टिक गईं।
"ये क्या है?"
"तुम्हारी समस्या का समाधान।"
विकास ने लिफाफा खोलकर देखा।
उसके अंदर बड़ी रकम का चेक था।
उसका चेहरा बदल गया।
"सर... इतनी बड़ी रकम?"
रोहन पीछे होकर कुर्सी पर बैठ गया।
"इसे पैसे मत समझो। इसे अपने भविष्य की कीमत समझो।"
विकास ने चेक वापस टेबल पर रख दिया।
"मैं मैम के साथ विश्वासघात नहीं कर सकता।"
रोहन कुछ नहीं बोला। उसने बस अपनी फाइल खोली और एक कागज़ विकास के सामने रख दिया।
विकास ने कागज़ पढ़ा। उसमें कंपनी के कुछ पुराने वित्तीय रिकॉर्ड थे।
रोहन ने धीमे स्वर में कहा,- "कुछ साल पहले कंपनी के एक पुराने प्रोजेक्ट में जो वित्तीय गड़बड़ी हुई थी... उसका पूरा रिकॉर्ड मेरे पास है।"
विकास का चेहरा पीला पड़ गया।
"आप... मुझे धमका रहे हैं?"
"नहीं।"
रोहन मुस्कुराया।
"मैं तुम्हें विकल्प दे रहा हूँ। पैसे लेकर मेरे साथ रहो... या फिर ये कागज़ अनन्या के सामने रख दो और खुद को समझाओ कि तुमने सही फैसला लिया।"
कमरे में कुछ पल के लिए बिल्कुल सन्नाटा छा गया।
विकास ने अपनी आँखें बंद कर लीं।
उसे पता था कि उसने अतीत में एक गलती की थी। वह गलती इतनी बड़ी नहीं थी कि कंपनी बर्बाद हो जाती, लेकिन अगर वह रिकॉर्ड सामने आता तो उसकी नौकरी, प्रतिष्ठा और शायद उसका पूरा करियर खत्म हो सकता था। उसने आज भले ही अपनी गलती बिना किसी को पता चले सुधार ली थी लेकिन अब अगर ये बात बहार आती तो ऐसा ही लगेगा की विकास ने फंड्स के साथ छेड़छाड़ की है और कंपनी में घोटाला किया है!
उसने धीरे से चेक उठा लिया।
रोहन की आँखों में संतोष उतर आया।
"good decision "
विकास ने काँपती आवाज़ में पूछा,
"आप चाहते क्या हैं?"
रोहन ने अपनी फाइल उसकी तरफ बढ़ाई।
"अभी सिर्फ़ इतना कि कंपनी के शेयरों से जुड़े सारे दस्तावेज़ मेरी निगरानी में रहें। और जब मैं कहूँ... तब ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू हो।"
विकास ने फाइल खोली।
उसमें कंपनी के शेयरहोल्डिंग पैटर्न, पुराने निवेशकों की जानकारी और कुछ कानूनी दस्तावेज़ थे।
उसने धीरे से पूछा,
"लेकिन मैम के साइन के बिना यह कैसे होगा?"
रोहन मुस्कुराया।
"उसके लिए रास्ता मैं निकाल लूँगा।"
...
उसी समय बाहर कॉरिडोर में कबीर खड़ा था।
वह CFO से एक जरूरी दस्तावेज़ लेने आया था, लेकिन दरवाज़ा बंद देखकर रुक गया।
अंदर की बातचीत उसे सुनाई नहीं दे रही थी। लेकिन विंडो पे लगे कर्टेंस से हलकी स झलक उस रोहन की दिखाई दी!
कबीर की भौंहें सिकुड़ गईं।
"रोहन यहाँ क्या कर रहा है?"
वह कुछ देर वहीं खड़ा रहा, फिर वापस अपने केबिन की ओर चला गया। उसने तय किया कि अब वह अनुमान के भरोसे नहीं रहेगा। उसे सबूत चाहिए था।
...
आज होने वाली मीटिंग्स में CFO ने ज्यादा इन्वॉल्वमेंट नहीं दिखाया और और रोहन के कहे हिसाब से उसने अनन्या को बाकी इंफॉर्मेशंस भी दी, जो उसकी कंपनी के फंड्स से रिलेटेड थी, इस बार कंपनी के पास अच्छा खासा फंड्स था, जिससे सभी एम्प्लाइज को बोनस दिया जा सकता था, और अनन्या अपने प्रॉफिट को हमेशा अपने एम्प्लाइज के साथ शेयर करती थी लेकिन रोहन को ये पसंद नहीं था इसलिए उसने विकास को अनन्या को ये बात बताने से मना कर दिया! शाम को अनन्या अपने केबिन में बैठी थी। रोहन उसके सामने कुछ फाइलें लेकर आया।
"आज फाइनेंस टीम से बात हुई।"
अनन्या ने सिर उठाया।
"सब ठीक है?"
"हाँ। बस कंपनी के कुछ पुराने शेयर डॉक्यूमेंट्स को व्यवस्थित करना होगा।"
अनन्या ने लापरवाही से कहा,
"ठीक है। जो ज़रूरी हो करवा दो।"
रोहन कुछ सेकंड उसे देखता रहा। यही तो वह चाहता था। अनन्या का यह भरोसा। उसका हर बार बिना सवाल किए उस पर विश्वास करना।
"तुम्हें मुझ पर भरोसा है न?"
रोहन ने अचानक पूछा। अनन्या ने हैरानी से उसकी तरफ देखा।- "ये कैसा सवाल है?"
"बस ऐसे ही। ये लो फिर, इस फाइल पर साइन कर दो , बाकी में मैनेज करलूँगा!" "
अनन्या मुस्कुरा दी- "तुम पर भरोसा न करूँ तो किस पर करूँ?"
और अनन्या ने फाइल लेकर उसके पहले पेज पर एक नजर डाली और बाकी बिना पढ़े सभी पेपर्स पर साइन कर दिया... ये पहली बार था जब अनन्या ने सभी पेपर्स को बिना ठीक से पढ़े उन पर साइन किया था, और इस बात से बिलकुल अनजान कि रोहन ने नार्मल फण्ड अप्रूवल फाइल के पेपर्स के बिच में शेयर ट्रांसफर एंड साइनिंग अथॉरिटी ट्रांसफर के पेपर्स भी थे..
रोहन ने उसकी आँखों में देखा। उस पल उसके अंदर कुछ भी नहीं हिला।
न अपराधबोध...
न पछतावा।
सिर्फ़ लालच।
उसने मन ही मन कहा—
"बस थोड़ा और भरोसा करो, अनन्या। जितना ज़्यादा भरोसा करोगी... उतना ही आसान होगा तुम्हें हर चीज़ से दूर करना। तुम्हे बर्बाद करना और तुम्हारी कंपनी पर राज़ करना !"
...
उस रात रोहन और निशा एक बार फिर मिले। इस बार जगह शहर का एक शांत रेस्टोरेंट था।
निशा ने पूछा,- "काम कितना आगे बढ़ा?"
रोहन ने मुस्कुराते हुए कहा, "CFO अब हमारे साथ है।"
निशा के चेहरे पर राहत दिखाई दी- "और शेयर?"
"प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी हो चुकी है। आज मेने फण्ड ट्रांसफर वाली फाइल के साथ शेयर ट्रांसफर वाले डॉक्यूमेंट पर भी अनन्य के सिग्नेचर ले लिए हैं!"
निशा कुछ पल चुप रही। फिर बोली,- "अनन्या के पास कंपनी के ज़्यादातर शेयर हैं। अगर वो भी तुम्हारे नाम होगये तो तुम्हे बोर्ड मीटिंग म भी कोई कुछ नहीं कह सकता!"
"मुझे पता है।बस कुछ दिन और, सभी बोर्ड मेंबर्स का अप्रूवल मिल जाए....."
"तो फिर?अनन्या का क्या करेंगे?"
रोहन ने मेज पर रखी कॉफी का कप उठाया।
"तबतक अनन्या को शेयर ट्रांसफर करने की बात पता नहीं चलनी चाहिए, बस उसके सारे राइट्स मेरे पास आजाये उसके बाद हमे उसकी जरूरत नहीं है"
निशा समझ गई।
"मतलब..."
रोहन ने उसकी तरफ देखा। निशा मुस्कुराई। दोनों की आँखें मिलीं।
उनके बीच एक खामोश प्लानिंग हो चुकी थी!
...
और दूसरी तरफ़... कबीर अपने कंप्यूटर पर कंपनी के शेयर रिकॉर्ड खोलकर बैठा था। उसने एक फाइल में कुछ ऐसा देखा, जिसे देखकर उसकी साँस रुक गई।
एक शेयर ट्रांसफर डॉक्यूमेंट पर...
रोहन का नाम मौजूद था।
कबीर कुर्सी से पीछे हो गया।-"ये कैसे हो सकता है?"
उसने फाइल दोबारा खोली।
दस्तावेज़ पर तारीख़ नई थी...
अब कबीर के पास सिर्फ़ शक नहीं था। उसके हाथ में पहली बार एक ऐसा सुराग था, जो सीधे रोहन की तरफ़ इशारा कर रहा था। उसने तुरंत फाइल अपने सिस्टम में सुरक्षित की और मोबाइल उठाया।
वह अनन्या को फोन करने ही वाला था कि...उसके दिमाग में आया कि अनन्या मेरी बात पर भरोसा क्यों करेगी, और बात इतनी बड़ी है कि, मुझे अनन्या को मिल कर उसे ये सब बताना होगा!
उसने अनन्या को मेसेज किया - "i want to meet you, its urgent and about company, you need to know something"
क्रमशः...




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