
रूहानी ने अपने बाबासा की आँखों में एक गर्व भरी चमक और एक अनकहा दर्द देखा! शौर्यवीर जी ने रूहानी के सर पर हाथ रखा और कहा- " आइये पंडित जी से आशीर्वाद लीजिये फिर वे आपके लगन की तैयारी करेंगे!"
रूहानी ने हाँ में अपना सर हिलाया और बोली- "जी बाबासा हम अभी तैयार होकर आते हैं!"

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