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chapter 1..

hey guys! make sure that you follow me coz that's how you can read my further story!

मेरा नाम Kashish है और ये बात है मेरे 12th क्लास के बाद की! में 18 साल की हो चुकी थी और 12th भी हो गयी थी तो एक फ्रीडम वाली फील आने लगी थी मुझे! क्यूंकि घरवालों ने हमेशा यही बोला कि स्कूल में अच्छे से पढ़ लो कॉलेज में तो सब अपनी मन मर्ज़ी ही करते हैं तो में excited thi अपनी कॉलेज लाइफ के लिए! लेकिन उससे पहले मेरी कम से कम 3 से 4 महीने की छुट्टी पड़ने वाली थी और उन दिनों में, मैं अपने दोस्तों के साथ ऐसे ही बहार घूमने निकल जाती थी और पुरे पुरे दिन घर नहीं आती थी!

ऐसे ही एक दिन sunday को मुझे याद आया कि मेरी दोस्त रूचि के घरवाले आज गांव शादी में जाने वाले हैं और वो घरपर अकेली होगी तो हम दोनों मिल कर खूब मस्ती करेंगे! मेने उसे कॉल भी लगाय लेकिन उसने उठाया नहीं था! काम में लगी होगी या खाना बना रही होगी, यही सोचकर में नहा- धो कर तैयार होकर अपनी दोस्त रूचि के घर जाने के लिए निकल गयी!

उसका घर मेरे घर से 10 मिनट की दूरी पर ही है! तो में जल्दी ही पहुँच गयी! मेने घर के अंदर जाकर देखा! घर खुला हुआ था! मैं रूचि को आवाज देते हुए अंदर गयी लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला! फिर मैंने सोचा क्या पता छत पर हो! तो मैं छत की तरफ जाने लगी! और रूचि को पीछे से डरने का सोचकर में धीरे धीरे कदमो से आगे बढ़ रही थी! सीढ़ियों के पास आकर मेने छत पर देखा तो भी मुझे कोई दिखाई नहीं दिया, मैं वापस जाने ही वाली थी कि मुझे कुछ गिरने की आवाज आयी!

एक्चुअली रूचि के घर की छत पर भी एक कमरा बना हुआ था! लेकिन उसमे उसका बड़ा भाई रहता था जो किसी एग्जाम की तैयारी करता था! तो उसके रूम में कोई जाता नहीं था और मैं भी कभी नहीं गयी थी! मुझे लगा हो सकता है कि वो उसी रूम में हो तो में दबे पाँव आगे बढ़ने लगी! रूम का दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था! और रूम से अजीब सी आवाजें आ रही थी!

वो आवाजें बहुत ही अजीब लगी मुझे तो मैं हल्का सा झुक कर देखने लगी! और मेरी आँखे फटी की फटी रह गयी! रूचि के भैया की बॉडी पर एक भी कपडा नहीं था और वो जोर जोर से हांफ रहे थे! उनके निचे एक और लड़की थी जिसे देखते ही मैं पहचान गयी! वो रूचि के पड़ोस में ही रहती है! वो भी बिलकुल नंगी थी और उसके मुँह से अजीब अजीब सी आवाज निकल रही थी! "आअह्ह्ह..उम्म्म्म...ओह्ह्ह..जैसी आवाजें!!"

मैंने सेक्स के बारे में अपने दोस्तों से सुना हुआ था और एक दो बार मम्मी के फ़ोन में सर्च भी किया था तो कुछ वीडियोस दिखी थी, अभी मेरे सामने का नजारा भी वैसा ही था!! लेकिन पहली बार आँखों के सामने ये नजारा देख मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे! और न जाने क्या सोचकर में दरवाजे के पास चुप गयी और उन दोनों को देखने लगी! मैं उन दोनो को सेक्स करते हुए देख रही थी कि कब मेरा हाथ भी मेरी चूत पर चला गया मुझे पता ही नहीं चला!

अब ये उम्र ही ऐसी है कि हार्मोनल changes तो होते ही हैं और बॉडी भी सेक्स कि डिमांड करने लगती है, अपोजिट gender कि तरफ attract होने lagte है! और व्ही मेरे साथ भी हो रहा था और कुछ लोगों के साथ तो ये और भी पहले होने लगता है लेकिन मेरे साथ ये चीज़ पहली बार ही हो रही थी! 18 सालों में मेने पहली बार अपनी चूत को इस तरीके से सहलाया!! मेने देखा कि मेरी चूत गीली ही गयी है और अजीब सी स्मेल भी आ रही है! लेकिन वो स्मेल मुझे achhi लगी तो में बार अपनी चूत पर हाथ लगाती और उसे सूंघती!

रूम में रूचि के भैया और वो दीदी दोनों एक दुसरे को बहुत ही भयंकर तरीके से चूमने और काटने में लगे हुए थे, उन दीदी के बूब्स बड़े बड़े थे जिनको भैया अपने हाथों से जोर जोर से दबा रहे थे और दीदी कि चूत में जोर जोर से धक्के मार रहे थे! और ज्यादा जोर से नहीं लेकिन वो आअह्ह्ह्ह..... उम्म्म्म.... और जोर से.... बोल रही थी! जो मुझे साफ़ सुनाई दे रहा था! दीदी बेड पर आधी लेटी हुई थी और उनके पेर पहले नीचे की तरफ थे लेकिन अब भैया ने उनके पेर अपने कंधे पर रख दिए और दीदी जोर जोर से सांस ले रही थी और अपनी गांड उछाल उछाल कर भैया का लंड अपने अंदर ले रही थी! जिसे देख मुझे भी बहुत अजीब लग रहा था!

तभी भैया ने एकदम से अपना लंड दीदी की चूत से निकाला, मैं भी उनके लंड को देख दीदी की जगह खुद को इमेजिन करने लगी! अब भैया बेड पर सीधे लेट गए और दीदी को अपनी कमर पर बिठा लिया, थोड़ा बहुत मैं भी समझ रही थी कि अब भैया कोनसी पोजीशन में आने वाले है! दीदी हल्का सा ऊपर उठी और उन्होंने भैया के लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी चूत के ऊपर सेट किया और बैठ गयी! दोनों की ही एक साथ आह निकली ! और दीदी अब भैया के लंड पर उछल उछल कर लंड अपने अंदर ले रही थी! हर झटके के साथ ही उनके बूब्स भी हिल रहे थे जिनको देख भैया भी निचे से धक्के मार रहे थे!

यहाँ मैं भी कबसे अपनी चूत पर हाथ फेर रही थी और अब मेरा मन हुआ कि में अपनी चूत में लंड न सही लेकिन ऊँगली तो ड़ालु, यही सोचकर मेने अपने लोअर के अंदर हाथ डाला और अपनी गीली चूत में ऊँगली डालने लगी लेकिन मुझे इतना जोर से दर्द हुआ की ऊँगली अंदर गयी ही नहीं और चीख निकली वो अलग!

शयद भैया को भी सुनाई दी इसलिए उन्होंने हल्का सा झांक कर देखा लेकिन तब तक मेने अपने मुँह पर हाथ रख लिया था ताकि मेरी चू की भी आवाज उन तक ना पहुंचे! नार्मल होते ही मेने अंदर देखा तो दीदी भैया की छाती पर ही लेटी हुई थी शयद वो दोनों ही झड़ चुके थे क्यूंकि जोर से हांफ रहे थे! मुझे बहुत दुःख हुआ कि मेने क्लाइमेक्स मिस कर दिया लेकिन अब मुझे जल्दी से जल्दी वहाँ से निकलना था!

मैंने जल्दी से अपना लोअर ठीक किया और दबे पाँव निचे कि तरफ आगयी! निचे आते ही मेने देखा कि रूचि सामने से दरवाजे से घर के अंदर आ रही है! उसको देख मैंने नार्मल होने की कोशिश की और उनके डाइनिंग टेबल की एक चेयर पर बैठ गयी!! और जल्दी से एक गिलास में पानी भरा!

रूचि की नजर अंदर आते ही सबसे पहले मेरे ऊपर गयी! और वो बोली- "अरे कशिश तू कब आयी?"

मैं- "अभी अभी बस 2 मिनट हुए! तू कहा गयी थी! मुझे लगा तू तो है नहीं इसलिए बस पानी पिके जाके वाली थी! "

रूचि- "अरे, वो मां पापा आज बहार गए थे न! इसलिए सोचा की लंच में मैगी खा लूँ! काफी दिन हो गये इसलिए मैगी लेने गयी थी! और इस वाली शॉप पर तो मिली नहीं इसलिए दूसरी वाली शॉप पर गयी थी इसलिए टाइम लग गया! तू बैठ में 2 मिनट में बना कर लाइ फिर दोनों आराम से तारक मेहता देखते हुए खाएंगे!"

मेरी तो हालत ख़राब हो रही थी, अब भी मेरी बॉडी में अजीब सी सेंसेशंस थी! जिस वजह से मेरा अभी कुछ करने का मन नहीं था इसलिए मेने रूचि से कहा- "हाँ मैं जरूर खाती लेकिन मुझे याद आया की अभी मुझे कुछ काम बताया था मम्मी ने और उसके बाद मुझे मम्मी के साथ मार्केट भी जाना है तो मैं शाम को आती हूँ तेरे पास वापस!"

रूचि ने मुझे रोकने की कोशिश की लेकिन मैं आखिर वहाँ से निकल आयी और सीधा अपने घर पहुंची! 12th में बोर्ड्स की वजह से मुझे एक अलग रूम दिया हुआ था, तो मैं अपने रूम में गयी और रूम अंदर से बंद कर लिया!

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